Ghoom Charakhya Ghoom: Ek Safarnama
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Descriptionवैसे तो सफरनामा हर युग में लिखे गए हैं, पर जो आपके सामने है वह अकादमिक भी है और मनोरंजक भी। घुमक्कड़ी का अपना आनंद है, अपनी सार्थकता है चाहे वह देश के अंदर सीमित हो या अन्य देशों को भी समेटे हो। हर जगह कुछ न कुछ सीखने को मिलता है, और इससे भी महत्वपूर्ण, एक जुड़ाव का अहसास दिलाता है। यह छोटी पुस्तक इसी दिशा में एक प्रयास है। लिखने को तो सैकड़ों पन्ने लिखे जा सकते थे पर कम से कम शब्दों में जीवन भर की घुमक्कड़ी को समेटा गया है और वह भी हर जगह की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ। तस्वीरों का सहारा नहीं लिया गया है। शब्दों के माध्यम से आप एशिया, यूरोप, और अमेरिका के अनेक जगहों का अवलोकन कर सकेंगे, शायद महसूस भी कर सकेंगे। अपना देश हमेशा साथ चलता है जो इस अध्ययन को स्वतः तुलनात्मक बना देता है। चलिए, सफर का आनंद लीजिए।दीपक कुमार ने एक शोधकर्ता और शिक्षक दोनों के रूप में लगभग पांच दशकों तक विज्ञान के इतिहास, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और चिकित्साशास्त्र के विषयों को सामान्य भाषा में प्रस्तुत करते हुए इन्हें लोकप्रिय बनाया है। वे अपनी पुस्तकों ‘विज्ञान और भारत में अंग्रेजी राज‘ (ग्रंथशिल्पी, 1998), ‘प्रौद्योगिकी और अंग्रेजी राज‘ (ग्रंथशिल्पी, 2000), ‘आतम खबर: संस्कृति, समाज और हम‘ (आकार बुक्स, 2022), (सं.) ‘टेक्नोलोजी एंड द राज‘ (आकार बुक्स, 2022), ‘साइंस एंड सोसाइटी इन मॉडर्न इंडिया‘ (कैंब्रिज, 2023), ‘कल्चर ऑफ साइंस एंड द मेकिंग ऑफ मॉडर्न इंडिया‘ (प्राइमस बुक्स, 2023) के लिए जाने जाते हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने चिकित्सा-शास्त्र के इतिहास, पर्यावरण के इतिहास और शिक्षा के इतिहास पर कुछ पुस्तकों का भी सह-संपादन किया है। वे कलकत्ता के ‘सोसाइटी फॉर द हिस्ट्री ऑफ साइंस’ के सह-संस्थापक अध्यक्ष हैं और उन्हें हैदराबाद के ‘मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी’ में मानद प्रोफेसर का पद प्राप्त है।
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